बदलती जिंदगी शायरी 2 लाइन

हम अक्सर बोलते थे कि नसीब नही बदलता है रोने से, ज़िन्दगी भर रोये नही हम बस इसी तस्सली से ।

एक वो समय था जब समय था, आज ये समय है कि समय ही नहीं ।

ये कशमकश है कैसे बसर ज़िन्दगी करें, पैरों को काट फेंके या चादर बड़ी करें।

डूबना नहीं था ज़िन्दगी की नैय्या में , इसलिए मैंने सपनो की नांव तैयार रखी।

ज़िंदा रहने की अब ये तरकीब निकाली है, ज़िंदा होने की खबर सबसे छुपा ली है।

इस दौरे सियासत का इतना सा फ़साना है बस्ती भी जलानी है मातम भी मनाना है।

काश मैं अपनी ज़िन्दगी का लाडला होता , जीत मेरी ही होती ,चाहे कोई भी मामला होता।

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